Friday, March 18, 2022

DUA

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ऐ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ,🌙ऐ सारी क़ायनात के शहंशाह ,🌙ऐ सारी मख्लक़ू के पालने वाले ,🌙ऐ ज़िन्दगी और मौत का फैसला करने वाले ,🌙ऐ आसमानों और ज़मीनों के मालिक ,🌙ऐ पहाड़ों और समन्दरों के मालिक ,🌙ऐ इंसानो और जिन्नातों के माबूद ,🌙ऐ अर्श -ए -आज़म के मालिक ,🌙ऐ फरिश्तों के माबूद ,🌙ऐ इज़्ज़त और ज़िल्लत के मालिक ,🌙ऐ बीमारियों से शिफ़ा देने वाले ,🌙ऐ बादशाहों के बादशाह .🌙ऐ अल्लाह हम तेरे गुनाहगार बन्दे हैं ,🌙तेरे ख़ताकार बन्दे हैं ,🌙हमारे गुनाहों को माफ़ फरमा ,🌙हमारी ख़ताओं को माफ़ फरमा ,🌙ऐ अल्लाह हम अपने अगले पिछले,सगीरा,कबीरा, छोटे, बड़े सभी गुनाहों और खताओं की और ना -फरमानियों की माफ़ी मांगते हैं ...🌙ऐ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हम अपने गुनाहोंसे तौबा करते हैं .हमारी तौबा क़ुबूल करले ..🌙ऐ अल्लाह हम गुनाहगार हैं ,🌙सियाकार हैं ,🌙बदकार हैं ,लेकिन जैसे भी है तेरे  महबूब के ऊममती है🌙तेरे हुक्मो के ना -फरमान हैं ,🌙ना -शुकरे हैं लेकिन मेरे माबूद तेरे नाम लेवा बंदेहैं तेरी तौहिद की गवाही देते हैं .🌙तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं है .🌙तेरे सिवा कोई बंदगी के लायक नहीं है .🌙तेरे सिवा कोई ताऱीफ के लायक नहीं है .🌙हमारे माबूद हमारे गुनाह तेरी रहमत से बड़े नहीं हैं .🌙तू अपनी रहमत से हमें माफ़ करदे🌙ऐ अल्लाह पाक आप हमें गुमराही के रास्ते से हटा कर सिरातल मुस्तक़ीम के रास्ते पे चलने वाला बना दे🌙ऐ अल्लाह ऐसी नमाज़ पढ़ने की तौफ़ीक़ अता कर जिस नमाज़ से तू राज़ी हो जाये ,🌙ज़िंदगी में ऐसे नेक अमल करने कि तौफ़ीक़ अता कर जिन अमालोंसे तू राज़ी हो जाये .🌙हमें ऐसी ज़िन्दगी गुज़ारने की तौफ़ीक़ अता कर जिस ज़िंदगी से तू राज़ी हो जाये .🌙ईमान पे ज़िंदा रख और ईमान पे ही मौत अता कर .🌙ऐ अल्लाह हमें तेरे हुक्मों की फ़र्माबरदारी करने वाला बना ..🌙और तेरे प्यारे हबीब जनाबे मोहम्मद रसूलुल्लाह (सलल्लाहोता 'आला अलैहि वस्सल्लम ) के नेक और पाकीज़ा तरीकों को अपनी ज़िन्दगी में लाने वाला बना .🌙ऐ अल्लाह हमारी परेशानियों को दूर करदे ,🌙ऐ अल्लाह जो बीमार हैं उन्हें शिफ़ा -कामिला अता फरमा .🌙ऐ अल्लाह जो क़र्ज़ के बोझ से दबे हुए हैं उनका क़र्ज़ जल्द से जल्द अदा करवा दे ,🌙ऐ अल्लाह शैतान से हमारी हिफाज़त फरमा🌙ऐ अल्लाह इस्लाम के दुश्मनों का मुँह काला कर ,🌙ऐ अल्लाह हलाल रिज़्क़ कमाने कि तौफ़ीक़ अता फरमा ,🌙 ऐ मेरे परवरदिगार पूरी दुनिया मे जितने लोग वफात पा चुके हैं उनकी मग्फिरत फरमा . .🌙उन्हे कब्र के अज़ाब से माफ फरमा . .🌙जो बीमार हैं या परेशान हैं तू अपने करम से माफ फरमा🌙और उनकी बीमारी और परेशानी को दूर फरमा. .🌙और ऐ मेरे परवरदिगार जिसने मुझे ये दुआ भेजी है उसके तमाम गुनाहो को माफ फरमा. .🌙और हर काम में क़ामयाबी अता फरमा . .🌙और उसके नसीब खोल दे. .🌙 ऐ परवर्दिगार- ए -आलम हमें माँगना नहीं आता लेकिन तुझे देना आता है तू हर चीज़ पे क़ादिर है..🌙 ऐ अल्लाह जो मांगा वो भी अता फरमा जो मांगने से रह गय वो भी इनायत फरमा ...🌙 हमारी दुआ अपने रहम से अपने करम से हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम के वसीले से क़ुबूल फरमा .और जिसने ये दुआ भेजी है और इसे आगे बढ़ा रहा है उसकी सारी परेशानियों,तकलीफ़ों,बिमारियों को दूर फरमा और सेहत तंदरूस्ती अता फरमा🤲
आमीन🌹सुम्मा आमीन🌹

Saturday, February 26, 2022

कुंडे की नियाज़ की हक़ीक़त।।

कुंडे की नियाज़ की हक़ीक़त।।

22 रज्जब उल मुरज्जब इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम की नियाज़।।

हिजरी 122 रज्जब की 22 तारीख़ की रात यानी 21 का दिन गुजार कर 22 की रात बा वक़्त ए नमाज़ ए तहज्जुद अल्लाह तआला ने सैय्यदना इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम को मक़ाम ए ग़ौसियत ए कुब्रा अता फरमाया।।

सुबह 22 रज्जब को आपने अल्लाह तआला की जानिब से ये अज़ीम नेमत मिलने पर बतौर ए शुक्र अदा करने के लिए नियाज़ करवाई जो दूध और चावल मिलाकर बनाई गई जिसे हम खीर कहते हैं।।

आप ख़ानदान ए रसूल सल्लम के चश्म ओ चिराग़ थे, आप के घर में टूटी चटाई और मिट्टी के बर्तन ही थे इसी पर आप शाकिर ओ साबिर थे, आप ने मिट्टी के पियाले में नियाज़ रख कर अपने दोस्त ओ अहबाब को बुला कर फरमाया कि आज रात अल्लाह तआला ने मुझे मक़ाम ए ग़ौसियत ए कुब्रा अता फ़रमाया है इसी का शुक्र अदा करते हुए ये नियाज़ आप लोगों को पेश करता हूं।।

आप के शाहब ज़ादे इमाम मूसा क़ाज़िम अलैहिस्सलाम और आप के दीगर मुसाहेबीन ने पूछा कि इस में हमारे लिए क्या फायदा है?

आप ने फरमाया कि रब्बे काबा की कसम अल्लाह तआला ने जो नेमत मुझे अता फरमाई है जिस का मैं शुक्र अदा करता हूं नियाज़ की शक्ल में इसी तरह इसी तारीख में जो भी शुक्र अदा करेगा और हमारे वसीले से जो दुआ मांगेगा तो अल्लाह तआला उसकी मुराद ज़रूर पूरा फरमाएगा और दुआ ज़रूर कबूल होगी क्योंकि अल्लाह तआला अपने शुक्र गुज़ार बन्दों को मायूस नहीं करता।। 

इमाम ज़ाफर सादिक़ अलैहिस्सलाम के परपोते सैय्यदना इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम से कुछ दुश्मन ए अहले बैत ने सवाल किया कि "जब हमारे घर में पीतल तांबे के बेहतरीन बर्तन मौजूद है तो मिट्टी के कुंडो की क्या ज़रूरत है?"
आप ने फरमाया हमारे नाना जान मोहम्मद रसूल अल्लाह सल्लम की सुन्नत है मिट्टी के बर्तन में खाना,
आज मुसलमानों ने हमारे नाना जान की सुन्नत को तर्क कर दिया है हम ने इस नियाज़ को मिट्टी के पियालों में इस लिए ज़रूरी करार दिया ताकि कम से कम साल में एक मर्तबा ही नाना जान की उम्मत मिट्टी के कुंडो में नियाज़ खाकर सुन्नत ए रसूल अल्लाह सल्लम अदा करे।।

कुंडे का फातिहा 22 रज्जब उल मुरज्जब को ही करें।
22 रज्जब ना ही आप के विशाल की तारीख़ है और ना ही विलादत की तारीख है, बल्कि इस दिन आपको मक़ाम ए ग़ौसियत ए कुब्रा अता की गई थी इसी खुशी में हम ये नियाज़ करते हैं।

आप तमामी हजरात को इमाम जाफर सादिक़ अलैिस्सलाम की नियाज़ मुबारक हो।।

~~ रेफरेंस ~~
ये ऊपर लिखी बात इन किताबों से साबित है।

📚 मिन्हाज उस सालेहीन।
✍️ सैयदना इमाम मोहि उद्दीन इब्ने अबू बकर बगदाद।

📚 कशफुल असरार।
✍️सैयदना इमाम अब्दुल्लाह बिन अली अस्फाहनी।

📚 मदाम ए असरार अहले बैत।
✍️ सैयदना इमाम मोहम्मद बिन इस्माईल मुतक्की।

📚 मखजन ए अनवार ए विलायत।
✍️ सैयदना इमाम बरहन उद्दीन अस्कलनी।

शेर-ए-ख़ुदा मौला अली रज़िअल्लाहु तआला अन्हु का इल्म

शेर-ए-ख़ुदा मौला अली रज़िअल्लाहु तआला अन्हु ने मस्जिद-ए-कूफ़ा के मेम्बर से दावा किया: "पूछ लो जो कुछ पूछना चाहते हो, इससे पहले के मैं तुम्हारे दरमियान से चला जाऊँ...।"

एक शख़्स उठा और उसने सवाल किया:
"या अली! कौन से जानवर बच्चे देते हैं, और कौन से जानवर अन्डे देते हैं ??"
मौला अली ने जवाब दिया:
"जिनके कान बाहर हैं वो बच्चे देते हैं और जिनके कान अन्दर हैं वो अन्डे देते हैं...।"

वह बैठ गया और दूसरा शख़्स उठा और उसने भी वही सवाल दोहराया:
"या अली! कौन से जानवर बच्चे देते हैं और कौन से जानवर अन्डे देते हैं...??? "
शेर-ए-ख़ुदा हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने जवाब दिया:
"जो अपने बच्चों को दूध पिलाते हैं वह बच्चे देते हैं और जो अपने बच्चों को दाना चुगवाते हैं वह अन्डे देते हैं...।"

वह बैठ गया और तीसरा शख़्स उट्ठा और उसने भी वही सवाल दोहराया:
"या अली! कौन से जानवर बच्चे देते हैं और कौन से जानवर अन्डे देते हैं ?? "
शेर-ए-ख़ुदा हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने
जवाब दिया:
"जो अपनी ग़िजा (खाना) को चबाकर खाते हैं वह बच्चे देते हैं और जो अपनी ग़िजा (खाना) को निंगल जाते है वह अंडे देते हैं...।

जर्मनी के एक रिसर्चर ने इस जवाब पर रिसर्च किया और पूरी दूनिया के चप्पे चप्पे में जाकर रिसर्च (तहक़ीक़) की.... रिसर्च के बाद उसका स्टेटमेन्ट यह था: 
"मैंने यह भी देखा है के हज़रत अली के ज़माने में आस्ट्रेलिया और अमेरिका ढूँन्ढा भी नहीं गया था... और ना ही हज़रत अली फिजिकली अरब से बाहर गये, लेकिन फिर भी उनका 1400 साल पहले यह दावे के साथ कहना इस बात की दलील है के या तो क़ायनात अली के सामने बनती रही है या अली ने क़ायनात को अपने सामने बनते देखा हो...।"

फ़रमान-ए-रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) है कि:
ऐ अली! मौमिन के सिवा तुमसे कोई मुहब्बत नहीं कर सकता और मुनाफ़िक के अलावा तुमसे कोई बुग़्ज़ नहीं रख सकता...।

सरकार (नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सहाबी (साथी) शेर-ए-ख़ुदा हज़रत अली रज़िअल्लाहु तआला अन्हु के इल्म का जब ये आलम है तो खुद सरकार-ए-मदीना के इल्म का आलम क्या होगा...।

Tuesday, May 12, 2015

HAZARAT SAIYAD MASTAN ZULFIKAR ALI Rahmatullahi Alayhi

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HIMATANGAR DARGAH
HAZARAT SAIYAD MASTAN ZULFIKAR ALI (Rahmatullahi Alayhi)


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NEAR RAILWAY DAKGAR(POST) OFFICE,
OPP: RAILWAY STATION,HIMATNAGAR
DIST : SABARKANTHA,
STATE: GUJARAT
INDIA - 383001

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1. MEMON HAJI ABDULRAZAK HAJI USMANBHAI

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2. MEMON MOHMEDRAFIK HAJI ABDULRAZAK
 
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3. MEMON MOINUDDIN HAJI ABDULRAZAK
 
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